पूर्व विधानसभा प्रत्याशी भारतीय जनता पार्टी के नेता सूर्यमुनि जी ने बताया कि वे विश्व प्रसिद्ध रामनगर काशी की प्राचीन रामलीला में भगवान श्रीराम जी के राज्याभिषेक में सम्मिलित होकर भगवान प्रभु श्रीराम जी का दर्शन पूजन करके आर्शीवाद प्राप्त किये.
रामनगर की रामलीला यहां शुरू है. इसकी खासियत यह है कि यह रामलीला बिना लाइट और साउंड के होती है. आज के दौर में काशी में रामलीला पेट्रोमैक्स की रोशनी में होती है. वाराणसी के इस रामलीला को यूनिस्को ने विश्व धरोहर के रूप में माना है.
पौराणिक आख्यानों के अनुसार जब महर्षि वेदव्यास काशी में आतिथ्य की उपेक्षा से रुष्ट होकर गंगा के पूर्वी तट पर लोलार्क के आग्नेय कोण में स्थित तपोवन में नई काशी बनाने को उद्यत हुए तब शिवजी ने विनती कर उन्हें रोका तथा आदर के साथ काशीवास की अनुमति प्रदान की। तब से यह स्थान व्यासकाशी नाम से प्रतिष्ठित हुआ तथा कालांतर में रामनगर नाम से जाना गया। आजादी से पूर्व 200 वर्षों तक रामनगर काशी की राजधानी रही। काशिराज के संरक्षण, भक्त रूपी जनता और आयोजकों के समर्पण से शुरू की गई रामलीला धीरे - धीरे विश्वप्रसिद्धि के स्वर्णिम सोपान चढ़ती गई और आज यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में शामिल होने का भी गौरव प्राप्त कर चुकी है।
रामनगर की रामलीला की विश्व प्रसिद्धि के पीछे एक साथ तमाम कारक हैं। लगभग 10 वर्ग किलोमीटर के प्राकृतिक मंच पर प्रसंगानुसार चलायमान यह मंचन बहुत ही सहजता के साथ बिना ध्वनि विस्तारक यंत्रों के तथा बिजली के बड़े रोशनी करने वाले उपकरणों के स्थान पर पुराने समय के पंचलाइट और मशाल की रोशनी में प्रत्येक दिन न्यूनतम दस हजार की भीड़ को मात्र राम लीला व्यास के "चुप रहो! सावधान!" स्वर के द्वारा अनुशासित किया जाता है। यह रामलीला की विशिष्टता के कुछ सहज उदाहरण हैं। इसी प्रकार की सहजता इस रामलीला की श्रेष्ठता है और यह सौम्य श्रेष्ठता ही इसकी विश्वप्रसिद्धि का निर्विवाद कारण है।